August 9, 2026
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उंगलियां चटकाना: क्या सच में नुक़सान होता है?

उंगलियां चटकाने की आदत दुनिया भर में इतनी आम है कि शायद ही कोई परिवार हो जहां इसे लेकर टोका-टाकी न होती हो। सबसे ज़्यादा दोहराई जाने वाली चेतावनी यही है कि इस आदत से आगे चलकर जोड़ों में गठिया हो जाता है और उंगलियां मोटी हो जाती हैं। सवाल यह है कि इस चेतावनी के पीछे कोई ठोस आधार है भी या यह सिर्फ़ एक पुरानी धारणा है जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलती चली आ रही है। चिकित्सा से जुड़ी सामान्य समझ इस डर की पुष्टि नहीं करती, हालांकि कुछ स्थितियों में सतर्क रहना ज़रूर ज़रूरी है।

वह चटकने की आवाज़ आती कहां से है

हमारे शरीर के जोड़ों के बीच एक चिकना तरल भरा होता है, जिसे साइनोवियल फ़्लूइड कहते हैं। यह तरल जोड़ों को आपस में रगड़ खाने से बचाता है और हरकत को आसान बनाता है। इसी तरल में ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें घुली हुई अवस्था में मौजूद रहती हैं। सामान्य हालत में ये गैसें कोई आवाज़ नहीं करतीं, क्योंकि जोड़ के भीतर दबाव संतुलित बना रहता है।

जब उंगली को खींचा या पीछे की ओर मोड़ा जाता है तो जोड़ के भीतर की जगह अचानक बढ़ जाती है और दबाव तेज़ी से घट जाता है। इस बदलाव के कारण घुली हुई गैस से छोटे बुलबुले बनते हैं, और यही प्रक्रिया चटकने की आवाज़ पैदा करती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि आवाज़ हड्डियों के आपस में टकराने से नहीं आती, जैसा आमतौर पर मान लिया जाता है। इसी वजह से एक बार चटकाने के बाद कुछ मिनट तक दोबारा वैसी आवाज़ नहीं आती — गैस को फिर से तरल में घुलने का समय चाहिए होता है।

यह अंतर समझना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि डर की जड़ यहीं है। जब लोग यह मान लेते हैं कि हड्डियां टकरा रही हैं, तो नुक़सान की कल्पना करना स्वाभाविक हो जाता है। असल प्रक्रिया दबाव और गैस से जुड़ी है, हड्डी के घिसने से नहीं, और यही बात इस पूरी बहस का रुख़ बदल देती है।

गठिया से जुड़ी धारणा कितनी सही है

इस विषय पर हुए अध्ययनों में उंगलियां चटकाने और गठिया के बीच कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है। सबसे चर्चित उदाहरण अमेरिकी चिकित्सक डोनाल्ड अंगर का है, जिन्होंने साठ साल से ज़्यादा समय तक जान-बूझकर सिर्फ़ अपने बाएं हाथ की उंगलियां चटकाईं और दाएं हाथ को वैसे ही छोड़ दिया। इतने लंबे समय बाद भी उन्हें दोनों हाथों के बीच कोई फ़र्क नहीं मिला। इस असामान्य प्रयोग के लिए उन्हें 2009 में इग नोबेल पुरस्कार दिया गया था।

एक अकेला उदाहरण किसी बात का अंतिम प्रमाण नहीं होता, लेकिन बड़े स्तर पर हुए अध्ययन भी इसी दिशा में इशारा करते हैं। कुछ शोधों में पकड़ की मज़बूती कम होने या हथेली में हल्की सूजन जैसी बातें ज़रूर सामने आई हैं, मगर इन नतीजों पर विशेषज्ञों के बीच सहमति नहीं है और इन्हें दोहराया भी नहीं जा सका है। कुल मिलाकर, गठिया वाली चेतावनी को अब तक ठोस समर्थन नहीं मिला है।

कब सचमुच ध्यान देने की ज़रूरत है

इसका मतलब यह नहीं कि हर आवाज़ को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया जाए। फ़र्क इस बात से पड़ता है कि आवाज़ के साथ और क्या हो रहा है। बिना किसी तकलीफ़ के आने वाली आवाज़ को आमतौर पर चिंता की बात नहीं माना जाता, लेकिन कुछ लक्षण किसी दूसरी समस्या का संकेत हो सकते हैं:

  • जोड़ चटकाते या हिलाते समय दर्द होना
  • उंगलियों या हथेली में सूजन दिखना
  • हाथ की हरकत पहले जैसी न रह जाना या जकड़न महसूस होना
  • किसी चोट के बाद अचानक नई आवाज़ शुरू हो जाना

ऐसी स्थिति में आवाज़ खुद समस्या नहीं, बल्कि किसी और परेशानी का लक्षण हो सकती है, और डॉक्टर से जांच कराना बेहतर रहता है। इसके अलावा जिन लोगों को पहले से जोड़ों की कोई बीमारी है, उन्हें अपने चिकित्सक की सलाह के हिसाब से चलना चाहिए।

बाक़ी लोगों के लिए यह आदत सेहत से ज़्यादा व्यवहार का मामला है। कई लोग तनाव या ऊब में अनजाने ही उंगलियां चटकाने लगते हैं, और अगर इसे छोड़ना हो तो हाथ को किसी और काम में लगाना आमतौर पर सबसे आसान तरीक़ा साबित होता है। मौजूदा जानकारी के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि यह आदत जोड़ों के लिए वैसा ख़तरा नहीं है जैसा इसे बताया जाता रहा है — हालांकि आसपास बैठे लोगों की नाराज़गी से बचाव का कोई वैज्ञानिक उपाय अब तक सामने नहीं आया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

उंगलियां चटकाने से आवाज़ क्यों आती है?

जोड़ के भीतर मौजूद तरल में दबाव घटने पर गैस के बुलबुले बनते और टूटते हैं। आवाज़ इसी प्रक्रिया से आती है, हड्डियों के टकराने से नहीं।

क्या इससे गठिया हो जाता है?

इस विषय पर हुए अध्ययनों में उंगलियां चटकाने और गठिया के बीच कोई सीधा संबंध नहीं मिला है।

डोनाल्ड अंगर का प्रयोग क्या था?

उन्होंने साठ साल से ज़्यादा समय तक सिर्फ़ एक हाथ की उंगलियां चटकाईं और दोनों हाथों में कोई फ़र्क नहीं पाया। इसके लिए उन्हें 2009 में इग नोबेल पुरस्कार मिला।

डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

अगर चटकाते समय दर्द हो, सूजन आए या हाथ की हरकत सीमित हो जाए, तो जांच कराना बेहतर है।

यह लेख स्वतंत्र रूप से लिखा गया है। इस ख़बर की मूल रिपोर्टिंग की थी bbc.com.

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संपादकीय टीम · नई दिल्ली

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