डाकघर की 12 महीने की सावधि जमा यानी टाइम डिपॉज़िट पर इस समय 6.9 फ़ीसदी सालाना ब्याज मिल रहा है। यह दर जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही के लिए लागू है, जिसकी घोषणा वित्त मंत्रालय ने 30 जून 2026 को की थी। पिछली तिमाही के मुक़ाबले इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। जिन लोगों के मन में यह सवाल है कि वरिष्ठ नागरिकों को इस पर कुछ अतिरिक्त मिलता है या नहीं, उनके लिए जवाब सीधा है — डाकघर की टाइम डिपॉज़िट में उम्र के आधार पर कोई अलग दर नहीं दी जाती।
किस अवधि पर कितना ब्याज
डाकघर की टाइम डिपॉज़िट चार अलग-अलग अवधियों में खोली जा सकती है, और हर अवधि की दर अलग है। मौजूदा तिमाही के लिए घोषित दरें इस प्रकार हैं:
- 1 साल — 6.9 फ़ीसदी
- 2 साल — 7.0 फ़ीसदी
- 3 साल — 7.1 फ़ीसदी
- 5 साल — 7.5 फ़ीसदी
इन दरों की एक ख़ास बात यह है कि ब्याज की गणना हर तिमाही होती है, जबकि भुगतान साल में एक बार किया जाता है। खाता खोलने के लिए कम से कम एक हज़ार रुपये जमा करने होते हैं और अधिकतम राशि की कोई सीमा तय नहीं है। यही वजह है कि छोटी बचत करने वाले और बड़ी रकम रखने वाले, दोनों तरह के जमाकर्ता इस योजना में आते हैं।
एक लाख रुपये पर हाथ में कितना आएगा
दर को प्रतिशत में समझने से ज़्यादा उपयोगी यह देखना है कि रकम पर असल में कितना बनता है। अगर कोई व्यक्ति एक लाख रुपये 12 महीने की टाइम डिपॉज़िट में रखता है, तो 6.9 फ़ीसदी की दर पर एक साल बाद मैच्योरिटी राशि लगभग 1 लाख 7 हज़ार 81 रुपये बनती है। यानी ब्याज के तौर पर करीब 7 हज़ार 81 रुपये मिलते हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि यह रकम 6,900 रुपये से कुछ ज़्यादा है, जबकि दर 6.9 फ़ीसदी बताई गई है। इसकी वजह तिमाही चक्रवृद्धि है — हर तीन महीने पर जुड़ने वाला ब्याज अगली तिमाही में मूलधन के साथ गिना जाता है। इस कारण असल प्रतिफल लगभग 7.08 फ़ीसदी बैठता है। जमा राशि बढ़ने के साथ यह अंतर भी उसी अनुपात में बढ़ता जाता है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए तस्वीर अलग है
ज़्यादातर बैंकों की सावधि जमा में वरिष्ठ नागरिकों को आम जमाकर्ताओं से कुछ अधिक ब्याज दिया जाता है, और यही आदत डाकघर की योजनाओं पर भी लागू मान ली जाती है। लेकिन डाकघर की टाइम डिपॉज़िट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। 12 महीने की जमा पर 60 साल से ऊपर के व्यक्ति को भी वही 6.9 फ़ीसदी मिलेगा जो किसी युवा जमाकर्ता को मिलता है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए डाकघर में अलग योजना चलाई जाती है, जिसे वरिष्ठ नागरिक बचत योजना यानी एससीएसएस कहा जाता है। इस पर जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के लिए 8.2 फ़ीसदी ब्याज तय है, और यह दर भी पिछली तिमाही से अपरिवर्तित रखी गई है। इसमें ब्याज हर तिमाही दिया जाता है, इसलिए एक लाख रुपये पर सालाना 8 हज़ार 200 रुपये यानी हर तिमाही 2 हज़ार 50 रुपये हाथ में आते हैं।
दोनों योजनाओं की तुलना करते समय अवधि का फ़र्क याद रखना ज़रूरी है। टाइम डिपॉज़िट 12 महीने की हो सकती है, जबकि एससीएसएस पाँच साल की योजना है। इसका एक फ़ायदा यह है कि खाता खोलने के दिन जो दर लागू होती है, वह पूरे पाँच साल के लिए तय हो जाती है — बाद की तिमाहियों में सरकार दरें घटाए या बढ़ाए, उस खाते पर असर नहीं पड़ता।
टैक्स और आगे की समीक्षा
टैक्स के मोर्चे पर एक भ्रम अक्सर देखने को मिलता है। डाकघर की टाइम डिपॉज़िट में आयकर की धारा 80सी के तहत डेढ़ लाख रुपये तक की कटौती का लाभ सिर्फ़ पाँच साल वाली जमा पर मिलता है, और वह भी सिर्फ़ पुरानी कर व्यवस्था चुनने वालों को। 12 महीने की जमा पर यह छूट उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे टैक्स बचाने के मक़सद से चुनना सही नहीं होगा।
छोटी बचत योजनाओं की दरों की समीक्षा सरकार हर तिमाही करती है, इसलिए मौजूदा दरें अगली घोषणा तक ही तय मानी जानी चाहिए। जिन लोगों को नई जमा करनी है, उनके लिए अगली तिमाही की घोषणा पर नज़र रखना उपयोगी रहेगा, क्योंकि टाइम डिपॉज़िट में दर खाता खोलने के समय के हिसाब से तय होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पोस्ट ऑफिस की 12 महीने की FD पर अभी कितना ब्याज है?
जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के लिए 6.9 फ़ीसदी सालाना। यह दर पिछली तिमाही से अपरिवर्तित रखी गई है।
एक लाख रुपये पर एक साल में कितना मिलेगा?
लगभग 1 लाख 7 हज़ार 81 रुपये, यानी करीब 7 हज़ार 81 रुपये ब्याज। तिमाही चक्रवृद्धि के कारण असल प्रतिफल लगभग 7.08 फ़ीसदी बैठता है।
क्या वरिष्ठ नागरिकों को ज़्यादा ब्याज मिलता है?
डाकघर की टाइम डिपॉज़िट में नहीं। उन्हें भी वही 6.9 फ़ीसदी मिलता है। अलग दर वरिष्ठ नागरिक बचत योजना में है, जिस पर 8.2 फ़ीसदी ब्याज है।
क्या 12 महीने की FD पर टैक्स छूट मिलती है?
नहीं। धारा 80सी की छूट सिर्फ़ पाँच साल की टाइम डिपॉज़िट पर मिलती है, और वह भी पुरानी कर व्यवस्था में।
यह लेख स्वतंत्र रूप से लिखा गया है। इस ख़बर की मूल रिपोर्टिंग की थी indiapost.gov.in.
