संयुक्त राष्ट्र के यूरोपीय मुख्यालय जिनीवा में एक असामान्य स्वागत समारोह देखने को मिला। पैलेस ऑफ़ नेशन्स परिसर में शुक्रवार को पाँच युवा मोरों को औपचारिक रूप से नया घर सौंपा गया। यूएन समाचार के अनुसार ये पक्षी भारत की ओर से भेजे गए उपहार हैं।
दशकों पुरानी परंपरा को मिली नई पीढ़ी
जिनीवा के इस परिसर में मोरों का रहना कोई नई बात नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक यह सिलसिला कई दशकों से चला आ रहा है और नई टोली उसी लंबी कड़ी का ताज़ा हिस्सा है। समय के साथ ये पक्षी परिसर की पहचान का हिस्सा बन चुके हैं, और यहाँ आने वाले राजनयिकों तथा आगंतुकों के लिए एक परिचित दृश्य हैं।
पाँच पक्षियों की यह नई खेप उस परंपरा को आगे बढ़ाती है, जिसे संयुक्त राष्ट्र परिसर की एक अनोखी विशेषता माना जाता रहा है।
भारत का राष्ट्रीय पक्षी, अंतरराष्ट्रीय मंच पर
मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है और देश की सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि इसे उपहार के रूप में भेजा जाना केवल एक पक्षी का हस्तांतरण नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक संकेत भी माना जाता है।
अपने चमकीले पंखों और धीमी, इतराती चाल के कारण ये पक्षी जहाँ भी रहते हैं, तुरंत ध्यान खींच लेते हैं। जिनीवा जैसे बहुपक्षीय कूटनीति के केंद्र में इनकी मौजूदगी परिसर को एक अलग ही रंग देती है।
पैलेस ऑफ़ नेशन्स की अहमियत
पैलेस ऑफ़ नेशन्स संयुक्त राष्ट्र का जिनीवा स्थित प्रमुख केंद्र है, जहाँ साल भर मानवाधिकार, निरस्त्रीकरण, स्वास्थ्य और शरणार्थी मामलों से जुड़ी अहम बैठकें होती रहती हैं। दुनिया भर के प्रतिनिधि यहाँ आते हैं, और परिसर का विस्तृत हरा-भरा मैदान इन पक्षियों के लिए उपयुक्त जगह उपलब्ध कराता है।
- पाँच युवा मोर भारत से जिनीवा पहुँचे
- शुक्रवार को पैलेस ऑफ़ नेशन्स में स्वागत किया गया
- यह परिसर की दशकों पुरानी परंपरा का हिस्सा है
आगे क्या
नए पक्षियों के परिसर में बस जाने के बाद उम्मीद की जा रही है कि वे भी अपने पूर्ववर्तियों की तरह यहाँ आने वालों के आकर्षण का केंद्र बनेंगे। संयुक्त राष्ट्र की ओर से इस परंपरा के भविष्य को लेकर फ़िलहाल कोई अतिरिक्त जानकारी साझा नहीं की गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जिनीवा के यूएन परिसर में कितने मोर पहुँचे हैं?
यूएन समाचार के अनुसार पाँच युवा मोर पैलेस ऑफ़ नेशन्स पहुँचे हैं, जिनका शुक्रवार को स्वागत किया गया।
ये मोर कहाँ से भेजे गए हैं?
ये पक्षी भारत की ओर से उपहार के रूप में भेजे गए हैं।
क्या यूएन परिसर में पहले भी मोर रहे हैं?
हाँ। रिपोर्ट के मुताबिक पैलेस ऑफ़ नेशन्स में मोरों के रहने की परंपरा कई दशकों से चली आ रही है और नई टोली उसी का हिस्सा है।
पैलेस ऑफ़ नेशन्स क्या है?
यह जिनीवा में संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख केंद्र है, जहाँ मानवाधिकार, स्वास्थ्य और निरस्त्रीकरण जैसे विषयों पर अंतरराष्ट्रीय बैठकें होती हैं।
यह लेख स्वतंत्र रूप से लिखा गया है। इस ख़बर की मूल रिपोर्टिंग की थी news.un.org.
