Geopolitics

होर्मुज़ पर ईरान-ओमान बातचीत में प्रगति, अराघची बोले- समझौते के क़रीब

ईरान और ओमान के बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले जहाज़ी रास्तों को लेकर चल रही बातचीत निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। ओमान के विदेश मंत्रालय ने इस बातचीत को सकारात्मक और रचनात्मक बताया है, जबकि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि दोनों देश समझौते के बहुत क़रीब हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार यह बातचीत तीन हफ़्तों से अधिक समय से चल रही है और अगस्त 2026 की शुरुआत में इसमें बड़ी प्रगति दर्ज की गई।

बातचीत में अब तक क्या तय हुआ

उपलब्ध रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच जहाज़ों के आने और जाने के प्रस्तावित रास्तों पर मोटे तौर पर सहमति बन गई है। बातचीत सिर्फ़ रास्तों तक सीमित नहीं रही — इसमें तकनीकी इंतज़ाम, दोनों देशों की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े पहलू भी शामिल रहे।

एक अहम प्रस्ताव संयुक्त समन्वय केंद्र बनाने का है। यह केंद्र समुद्री यातायात का प्रबंधन करेगा और जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले जहाज़ों से जानकारी एकत्र करेगा। इस तरह का साझा ढांचा दोनों देशों को अलग-अलग निगरानी करने के बजाय एक व्यवस्था के तहत काम करने की गुंजाइश देता है।

नया रास्ता कैसे काम करेगा

समझौते के तहत जहाज़ फ़िलहाल एक अस्थायी रास्ते से गुज़रेंगे। यह व्यवस्था तब तक रहेगी जब तक दोनों देश स्थायी रास्ते पर सहमत नहीं हो जाते, जो पुरानी ट्रैफ़िक सेपरेशन स्कीम की जगह लेगा। यही पुरानी व्यवस्था संघर्ष शुरू होने से पहले इस्तेमाल की जाती रही थी।

ईरान सरकार से जुड़े एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि नई व्यवस्था में व्यावसायिक जहाज़ फ़ारस की खाड़ी में ईरान के नियंत्रण वाले रास्ते से प्रवेश करेंगे और ओमान के नियंत्रण वाले रास्ते से बाहर निकलेंगे। यानी आने और जाने के रास्ते अलग-अलग होंगे और उनकी ज़िम्मेदारी भी अलग-अलग देशों के पास रहेगी।

समझौता होने भर से बात नहीं बनेगी

ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने साफ़ किया है कि अकेले यह समझौता मौजूदा संकट का हल नहीं है। उनके मुताबिक जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना कुछ अन्य शर्तों पर निर्भर करेगा, जिनमें अमेरिका से मुआवज़े की मांग भी शामिल है।

इसका मतलब यह है कि ईरान और ओमान के बीच तकनीकी सहमति बन जाने के बावजूद व्यापक तस्वीर अभी अनसुलझी है। जहाज़ी आवाजाही सामान्य कब होगी, यह इस द्विपक्षीय बातचीत से बाहर के कारकों पर भी टिका हुआ है।

यह रास्ता अहम क्यों है

होर्मुज़ जलडमरूमध्य फ़ारस की खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ख़ासकर ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज़ से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यही वजह है कि यहां की हर हलचल पर दुनिया भर की नज़र रहती है।

आगे की स्थिति इस पर निर्भर करेगी कि प्रस्तावित रास्तों और समन्वय केंद्र को लेकर औपचारिक घोषणा कब होती है, और अराघची जिन अतिरिक्त शर्तों की बात कर रहे हैं उन पर क्या रुख़ बनता है। तब तक इस बातचीत को एक अहम लेकिन अधूरी प्रगति के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ईरान और ओमान के बीच बातचीत किस बारे में है?

होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले जहाज़ी रास्तों और उनके प्रबंधन को लेकर। इसमें आने-जाने के अलग रास्ते और एक संयुक्त समन्वय केंद्र का प्रस्ताव शामिल है।

क्या समझौता हो चुका है?

रिपोर्ट्स के अनुसार प्रस्तावित रास्तों पर मोटे तौर पर सहमति बनी है और ईरानी विदेश मंत्री ने दोनों देशों को समझौते के बहुत क़रीब बताया है। औपचारिक और अंतिम रूप अभी स्पष्ट नहीं है।

नई व्यवस्था में जहाज़ किस रास्ते से गुज़रेंगे?

बताया गया है कि व्यावसायिक जहाज़ ईरान के नियंत्रण वाले रास्ते से खाड़ी में प्रवेश करेंगे और ओमान के नियंत्रण वाले रास्ते से बाहर निकलेंगे। तब तक एक अस्थायी रास्ता इस्तेमाल होगा।

क्या इससे जलडमरूमध्य दोबारा खुल जाएगा?

ज़रूरी नहीं। ईरानी विदेश मंत्री अराघची का कहना है कि दोबारा खोलना अन्य शर्तों पर निर्भर करेगा, जिनमें अमेरिका से मुआवज़े की मांग भी शामिल है।

यह लेख स्वतंत्र रूप से लिखा गया है। इस ख़बर की मूल रिपोर्टिंग की थी bbc.co.uk.

लेखक के बारे में

संपादकीय टीम · नई दिल्ली

bbchindinews पर राष्ट्रीय, कारोबार, सेहत और जीवनशैली से जुड़ी ख़बरें और व्याख्या। हर रिपोर्ट प्रकाशित सार्वजनिक जानकारी और आधिकारिक घोषणाओं के आधार पर तैयार की जाती है, और स्रोत का हवाला लेख के अंत में दिया जाता है।

कवर करते हैं: राष्ट्रीयकारोबारसेहतजीवनशैली

46 लेख

Leave a comment

Your email address will not be published.